रोहित शेट्टी फायरिंग मामला: 3 लाख रुपये की सुपारी, सिग्नल ऐप का जाल और 1600 नंबरों की जांच, क्राइम ब्रांच के बड़े खुलासे

मशहूर फिल्म डायरेक्टर रोहित शेट्टी के घर पर हुई फायरिंग मामले की गुत्थी सुलझाते हुए मुंबई क्राइम ब्रांच ने सनसनीखेज खुलासे किए हैं. जांच में सामने आया है कि इस वारदात को अंजाम देने के लिए शूटर दीपक को 3 लाख रुपये का लालच दिया गया था. इस पूरी साजिश में आरजू बिश्नोई का नाम भी सामने आया है, जिसने लॉजिस्टिक और हथियार मुहैया कराने में अहम भूमिका निभाई थी.

क्राइम ब्रांच के सूत्रों के मुताबिक, शूटर दीपक और उसका साथी गोलू एक ही इलाके (बाह गांव) के रहने वाले हैं और पिछले 4 सालों से दोस्त हैं. दीपक का परिवार खेती और मजदूरी करता है, जबकि दीपक और गोलू के पास कोई पक्की नौकरी नहीं थी. इसी का फायदा उठाकर गोलू ने उसे मोटी रकम का लालच देकर अपराध की दुनिया में धकेल दिया.

आरोपी आपस में सिग्नल ऐप के जरिए करते थे बातचीत

पुलिस को गुमराह करने के लिए आरोपी आपस में सिग्नल ऐप के जरिए बातचीत करते थे. तकनीकी रूप से शातिर इन आरोपियों को पकड़ने के लिए मुंबई क्राइम ब्रांच ने जमीन पर उतरकर काम किया.

सूत्रों ने बताया कि पुलिस टीम लगातार 8 दिनों तक फील्ड पर रही. करीब 1600 संदिग्ध मोबाइल नंबरों के डेटा को खंगाला गया. मोबाइल टावर लोकेशन और हाल ही में एक्टिव हुए नए नंबरों की मदद से पुलिस आरोपियों के ठिकाने तक पहुंची.

गिरफ्तारी के बाद दीपक और गोलू के बयानों में भारी विरोधाभास देखने को मिल रहा है. दीपक का दावा की उसे हथियार गोलू ने दिया था वहीं गोलू का दावा है कि दीपक खुद अपने साथ हथियार लेकर आया था. पुलिस अब फॉरेंसिक जांच के जरिए इस सच का पता लगा रही है कि आखिर हथियार का असली सप्लायर कौन था.

जांच में यह भी पता चला है कि गोलू साल 2025 में राजस्थान में हुई एक फायरिंग की घटना में भी शामिल था. जब पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस के जरिए गोलू पंडित की लोकेशन आगरा में ट्रेस की और वहां छापेमारी की, तो घेराबंदी बढ़ते देख आरोपी ने सरेंडर कर दिया.

सूत्रों का कहना है कि आरजू बिश्नोई ने ही इस पूरी वारदात के लिए बैक-एंड सपोर्ट और लॉजिस्टिक की जिम्मेदारी संभाली थी. फिलहाल, पुलिस डिजिटल सबूतों और पैसों के लेनदेन की कड़ियों को जोड़ रही है. आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल केस में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं.

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