खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दूसरे केंद्रीय मंत्रियों का करीबी बता कर धोखाधड़ी के आरोपी को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है. ED की तरफ से दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोपी मोहम्मद कासिफ को जमानत देते समय सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को आधार बनाया है कि वह 3 साल से जेल में है. उसकी तरफ से ठगी गई रकम बहुत ज्यादा नहीं है और उसने भविष्य में इस तरह की हरकत न करने का वचन दिया है.
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसने कासिफ की जमानत याचिका खारिज की गई थी. बेंच ने उसे मुकदमे में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया. उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर वह जमानत की शर्तों का उल्लंघन करता है, तो ED उसकी जमानत रद्द करवाने के लिए निचली अदालत जा सकता है.
उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर के सूरजपुर थाने में कासिफ पर धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की एफआईआर दर्ज हुई थी. आरोप है कि उसने पीएम मोदी के साथ अपनी फर्जी तस्वीरें तैयार कीं और उन्हें फेसबुक और इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया. उसने दूसरे मंत्रियों के साथ भी अपनी फर्जी तस्वीरें पोस्ट कीं. उसने ऐसी छवि पेश की जैसे उसकी पहुंच सरकार में ऊंचे पदों तक है. इस छवि का इस्तेमाल कर उसने लोगों से सरकारी नौकरी और टेंडर दिलाने के नाम पर पैसे ठग लिए.
सूरजपुर थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर 2023 में ED ने कासिफ पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया और उसे गिरफ्तार किया. अब सुप्रीम कोर्ट ने 3 साल से हिरासत में होने के आधार पर उसे जमानत पर रिहा कर दिया है. कोर्ट ने कहा है कि मामले में उसकी तरफ से की गई उगाही सिर्फ 1 करोड़ 10 लाख रुपये है. उसने यह लिखित आश्वासन दिया है कि वह भविष्य में उच्च संवैधानिक पद पर बैठे लोगों या सरकारी अधिकारियों के नाम का दुरुपयोग नहीं करेगा.
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