Suvendu Govt ends Imam Allowances: पश्चिम बंगाल सरकार ने धार्मिक आधार पर दी जाने वाली योजनाओं जैसे इमाम और पुरोहितों के भत्ते को समाप्त करने का बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि सार्वजनिक धन का उपयोग शिक्षा जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में होना चाहिए, न कि धार्मिक भत्तों पर.
यह निर्णय राज्य सरकार की दूसरी कैबिनेट बैठक में लिया गया, जिसमें महिलाओं के लिए नई वित्तीय योजनाओं और पूरे राज्य में मुफ्त बस यात्रा को भी मंजूरी दी गई.
शिक्षा पर जोर
मुख्यमंत्री ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि अब फंड का इस्तेमाल “मेरिट बेस्ड” होगा, जिसमें सभी धर्मों और पृष्ठभूमियों के लोग समान रूप से शामिल होंगे. उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की लगभग 90% आबादी सरकारी शैक्षणिक संस्थानों पर निर्भर है, लेकिन ये संस्थान सुविधाओं और प्रतिस्पर्धा के मामले में निजी संस्थानों से पीछे हैं.
सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए कई योजनाएं पेश की हैं, जिनमें शामिल हैं:
स्मार्ट स्कूल और स्मार्ट क्लासरूम की स्थापना
आधुनिक लैब और लाइब्रेरी की व्यवस्था
खेल के मैदानों का विकास
शिक्षकों और स्टाफ की कमी को दूर करना
अन्य अहम फैसले
शुभेंदु सरकार के महत्वपूर्ण फैसले
सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) लागू करने का भी निर्णय लिया है. साथ ही, शिक्षा संस्थानों में राजनीतिक नियुक्तियों को खत्म करने और शिक्षा को राजनीति से दूर रखने की बात कही गई है. सरकार का फोकस अब संसाधनों को शिक्षा और बुनियादी ढांचे की ओर मोड़कर दीर्घकालिक सुधार करने पर है.
गौरतलब है कि शुभेंदु अधिकारी सरकार ने अपनी दूसरी कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसलों को मंजूरी दी है, जिनका सीधा असर आम लोगों, खासकर महिलाओं पर पड़ेगा. कैबिनेट बैठक के बाद अग्निमित्रा पॉल ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि सरकार ने “अन्नपूर्णा योजना” को मंजूरी दे दी है. इसके तहत राज्य की महिलाओं को 1 जून से हर महीने 3000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खाते में दी जाएगी.
इसके साथ ही, महिलाओं के लिए एक और बड़ा फैसला लेते हुए सरकार ने 1 जून से सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा देने का ऐलान किया है, जिससे उनकी रोजमर्रा की आवाजाही आसान होगी. इसके अलावा, कैबिनेट ने 7वें राज्य वेतन आयोग के गठन को भी मंजूरी दी है, जिससे सरकारी कर्मचारियों के वेतन और भत्तों की समीक्षा की जा सकेगी. सरकार के ये फैसले सामाजिक कल्याण और आर्थिक राहत पर केंद्रित हैं, खासतौर पर महिलाओं और कर्मचारियों को ध्यान में रखते हुए.