दिल्ली-NCR में चक्का जाम का ऐलान, तीन दिन तक थम रहेंगे ट्रकों के पहिए, परिवहन संगठनों का विरोध प्रदर्शन

All India Motor Transport Congress (AIMTC) के नेतृत्व में दिल्ली-एनसीआर की 68 से अधिक परिवहन एसोसिएशन और यूनियन ने 21 मई से 23 मई 2026 तक तीन दिवसीय चक्का जाम का ऐलान किया है. परिवहन संगठनों ने आरोप लगाया है कि Commission for Air Quality Management (CAQM), अदालतों और दिल्ली सरकार की ओर से लागू की गई नीतियां परिवहन उद्योग के लिए अन्यायपूर्ण और अव्यावहारिक हैं, जिससे लाखों ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों और कर्मचारियों की आजीविका प्रभावित हो रही है.

AIMTC का दावा है कि वह देशभर के लगभग 95 लाख ट्रक चालकों और 26 लाख निजी बस, टैक्सी और कैब संचालकों का प्रतिनिधित्व करती है. परिवहन संगठनों का मुख्य विरोध पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) में भारी बढ़ोतरी और BS-IV कमर्शियल वाहनों पर प्रस्तावित प्रतिबंध को लेकर है. संगठनों का कहना है कि दिल्ली आने वाले सभी मालवाहक वाहनों पर बिना किसी भेदभाव के ECC बढ़ा दिया गया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट का मूल उद्देश्य केवल उन ट्रांजिट वाहनों को नियंत्रित करना था जो दिल्ली को कॉरिडोर के रूप में इस्तेमाल करते हैं.

AIMTC का कहना है कि पहले आवश्यक वस्तुएं लेकर आने वाले वाहनों और दिल्ली में लोडिंग के लिए खाली प्रवेश करने वाले वाहनों को ECC से छूट थी, लेकिन अब उन पर भी शुल्क लगाया जा रहा है. इसके अलावा BS-VI वाहनों पर भी ECC लगाया जा रहा है, जबकि इन्हें कम प्रदूषण फैलाने वाले वाहन माना जाता है और GRAP-IV प्रतिबंधों के दौरान भी अनुमति दी जाती है.

संगठनों ने दावा किया कि हल्के कमर्शियल वाहनों (LCV) पर ECC को 1400 रुपये से बढ़ाकर लगभग 2000 रुपये और भारी ट्रकों पर 2600 रुपये से बढ़ाकर 4000 रुपये कर दिया गया है. यानी शुल्क में लगभग 40 से 55 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हुई है. उनका आरोप है कि साल 2015 से अब तक ECC के रूप में करोड़ों रुपये वसूले गए, लेकिन दिल्ली की वायु गुणवत्ता में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ.

परिवहन संगठनों ने यह भी आरोप लगाया कि 1 नवंबर 2026 से BS-IV और उससे नीचे के कमर्शियल वाहनों के दिल्ली प्रवेश पर प्रस्तावित प्रतिबंध वैज्ञानिक और कानूनी आधार पर नहीं है. उनका कहना है कि इन वाहनों के पास वैध फिटनेस और PUCC प्रमाणपत्र हैं और मोटर वाहन अधिनियम के तहत उन्हें 15 सालों तक संचालन की अनुमति है. ऐसे में संगठनों के मुताबिक, इस फैसले से दिल्ली-NCR के 17 लाख से अधिक ट्रक ऑपरेटरों और उनके परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी.

AIMTC और अन्य यूनियनों ने सरकार से मांग की है कि ECC में की गई बढ़ोतरी तुरंत वापस ली जाए, BS-VI वाहनों को ECC से पूरी तरह छूट दी जाए और केवल ट्रांजिट वाहनों पर ही ECC लगाया जाए. इसके अलावा BS-IV कमर्शियल वाहनों के दिल्ली प्रवेश पर प्रस्तावित प्रतिबंध को भी वापस लेने की मांग की गई है.

परिवहन संगठनों ने चेतावनी दी है कि फिलहाल आंदोलन सांकेतिक रूप से किया जा रहा है, लेकिन यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो भविष्य में दिल्ली-एनसीआर में अनिश्चितकालीन परिवहन बंद किया जा सकता है, जिससे सप्लाई चेन, बाजार और आम जनजीवन प्रभावित हो सकता है.

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