‘ओरिजिनल कुछ नहीं!’ चाइनीज़ रोबोट को अपना बताने वाले गलगोटिया यूनिवर्सिटी का वीर दास ने उड़ाया मजाक

दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान एक रोबोडॉग ने जितनी चर्चा बटोरी, उतनी शायद किसी और स्टॉल ने नहीं बटोरी. लेकिन ये चर्चा विवाद की वजह से हुई. ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी अपने स्टॉल पर एक रोबोडॉग लेकर पहुंची थी, जिसे ‘ओरियन’ नाम दिया गया था. शुरुआत में इसे यूनिवर्सिटी की बड़ी उपलब्धि की तरह पेश किया गया, लेकिन जल्द ही मामला उलझ गया.

विवाद बढ़ने के बाद यूनिवर्सिटी ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने कभी ये दावा नहीं किया कि रोबोडॉग उन्होंने बनाया है. ये सिर्फ उनके एआई निवेश का हिस्सा था और उसे प्रदर्शन के लिए लाया गया था. एक अन्य प्रोफेसर ने भी मीडिया से बात करते हुए कहा कि बात को गलत तरीके से समझ लिया गया है. कंपनी का लोगो भी छुपाया नहीं गया था.

वीरदास ने कसा तंज

इसी बीच अभिनेता और स्टैंड-अप कॉमेडियन वीर दास ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तंज कसते हुए लिखा, ‘कुछ भी ओरिजिनल नहीं है, जब आप इसके बारे में सोचते हैं. इंसान खुद में ही एक क्रिएशन है जो इंटरैक्ट करते हैं और नए रूप में उभरते हैं, ये सब आसमान की महान गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने बनाया है.’

‘देसी डॉग को गोद ले लें’

इतना ही नहीं, वीर दास ने एक असली देसी डॉग की तस्वीर शेयर करते हुए मजाक में लिखा कि ‘मैं इस मौके का उपयोग करके सभी को एक देसी डॉग गोद लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहता हूं. वो बहुत प्यारे होते हैं. मैंने अभी उसे बताया कि उसे गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने नहीं बनाया है.’ उनका ये पोस्ट सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है.

 

विदेशी प्रोडक्ट को बताया अपना

बता दें कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें यूनिवर्सिटी की एक प्रोफेसर इस रोबोटिक डॉग की खूबियां गिना रही थीं. बताया गया कि ये कैंपस में निगरानी कर सकता है, इधर-उधर घूम सकता है और कई तरह के सर्विलांस का काम कर सकता है. लेकिन कुछ टेक जानकारों ने इसे तुरंत पहचान लिया कि ये मशीन चीन की कंपनी यूनिट्री रोबोट्स की है, जो पहले से बाजार में उपलब्ध है. इसके बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे. लोगों ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी किसी विदेशी प्रोडक्ट को अपना बताकर पेश कर रही है. इसके बाद मामला समिट के आयोजकों तक पहुंच गया और यूनिवर्सिटी को समिट से बाहर होने के लिए कहा गया. हालांकि यूनिवर्सिटी की ओर से कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है.


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