2 सीटें जीतने की थी उम्मीद, राज्यसभा चुनाव का बदल गया समीकरण, कांग्रेस की राह में कौन बड़ा रोड़ा?

राज्यसभा चुनाव से पहले तेलंगाना में सियासी माहौल गरमा गया है. दो सीटों के लिए होने वाली वोटिंग में अब तक कांग्रेस को साफ बढ़त माना जा रहा था, लेकिन बीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव के सक्रिय होने से मुकाबला खुला हो गया है. देश की 37 सीटों पर चुनाव होने हैं और तेलंगाना अब चर्चा का बड़ा केंद्र बन गया है.

बीआरएस ने बढ़ाई कांग्रेस की चिंता
तेलंगाना में भाजपा की स्थिति मजबूत नहीं है, इसलिए मुकाबला सीधा कांग्रेस और बीआरएस के बीच बनता दिख रहा है. केसीआर ने कम से कम एक उम्मीदवार उतारने का फैसला कर कांग्रेस की रणनीति को चुनौती दे दी है. खबर है कि वे किसी बड़े नाम को मैदान में उतार सकते हैं.

नंबर गेम से तय होगी बाजी
एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 41 विधायकों का समर्थन चाहिए. बीआरएस के पास 37 विधायक हैं, लेकिन इनमें से 10 विधायक कांग्रेस के साथ जा चुके हैं. इनकी सदस्यता को लेकर मामला चल रहा है. आठ विधायकों पर स्पीकर ने बीआरएस की आपत्ति खारिज कर दी है, जबकि दो पर फैसला बाकी है. अगर बीआरएस अपने विधायकों को साथ रखती है तो उसे सिर्फ चार और वोटों की जरूरत होगी. बताया जा रहा है कि पार्टी दूसरे दलों से समर्थन जुटाने में लगी है.

कांग्रेस के पास बढ़त, लेकिन सतर्कता जरूरी
कांग्रेस के पास 66 विधायक हैं और उसे सीपीआई के एक विधायक का समर्थन भी हासिल है. पहले पार्टी को भरोसा था कि दोनों सीटें आसानी से मिल जाएंगी, लेकिन अब उसे पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरना होगा.

छोटे दलों की भूमिका अहम
बीआरएस से अलग हुए 10 विधायकों का रुख चुनाव की दिशा तय कर सकता है. इसके अलावा भाजपा के आठ और एआईएमआईएम के सात विधायक भी अहम भूमिका निभा सकते हैं. ऐसे में दूसरी सीट पर कड़ा मुकाबला होने की संभावना है.

संभावित चेहरों पर चर्चा
कांग्रेस एक सीट से अभिषेक मनु सिंघवी को फिर से भेज सकती है. दूसरी सीट के लिए मुख्यमंत्री के सलाहकार वी. नरेंद्र रेड्डी और रिटायर्ड जज जस्टिस सुदर्शन रेड्डी के नाम चर्चा में हैं.

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