SIR पर सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी बोलीं- लोकतंत्र बचाने की लड़ रही हूं लड़ाई; CJI ने कहा, योग्य मतदाता का नाम नहीं कटने देंगे

पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट सुधार यानी SIR पर चुनाव आयोग से भिड़ने के बाद ममता बनर्जी लड़ाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचीं. बुधवार, 4 फरवरी को ममता न सिर्फ बतौर याचिकाकर्ता कोर्ट में पेश हुईं, बल्कि बहस भी की. चुनाव आयोग ने ममता की याचिका में रखी गई बातों का जवाब देने के लिए समय मांगा. इसके बाद कोर्ट ने सुनवाई सोमवार के लिए स्थगित कर दी.

ऐतिहासिक मौका, अभूतपूर्व बंदोबस्त
सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में यह पहला मौका था जब कोई मुख्यमंत्री बतौर याचिकाकर्ता कोर्ट में पेश हो रहा था. ममता के साथ समर्थकों की भीड़ आने की आशंका को देखते हुए कोर्ट के बाहर सुरक्षा का अभूतपूर्व बंदोबस्त किया गया था. हालांकि, सुबह लगभग 10:10 पर ममता बनर्जी बिना किसी तामझाम के सुप्रीम कोर्ट पहुंच गईं. सुरक्षा कारणों से उनकी गाड़ी को अंदर तक ले जाने की इजाजत पहले ही दे दी गई थी.

‘आप मेरे आंख और कान’
लगभग 10:14 पर ममता बनर्जी कोर्ट नंबर 1 यानी चीफ जस्टिस की कोर्ट में दाखिल हुईं और सबसे पीछे वाली सीट पर बैठ गईं. एक वकील ने उनसे आगे जाने का अनुरोध किया. इस पर ममता ने विनम्रता से कहा, ‘आप लोग मेरी आंख और कान हैं. मुझे आपके माध्यम से सब पता चलेगा चलता रहेगा.’

ममता ने किया इंतेजार
सुबह 10:30 पर चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच बैठी. कोर्ट ने लिस्ट के अनुसार सुनवाई शुरू कर दी. पश्चिम बंगाल SIR का मामला इस लिस्ट में नंबर 21 पर था. ऐसे में यह साफ था कि बंगाल मामले पर सुनवाई में काफी समय लगेगा. ममता पूरे धैर्य से अपने मामले की प्रतीक्षा में कोर्ट में बैठी रहीं. बीच में एक बार वह सुप्रीम कोर्ट के सबसे बड़े प्रशासनिक अधिकारी सेक्रेटरी जनरल के कमरे में चाय पीने के लिए गईं.

कम समय की दलील
आखिरकार दोपहर लगभग 1:05 पर पश्चिम बंगाल मामले की सुनवाई शुरू हुई. ममता बनर्जी की तरफ से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कोर्ट को संबोधित किया. उन्होंने बताया कि 19 जनवरी को कोर्ट ने लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी (तार्किक विसंगति) श्रेणी में आए लोगों को दस्तावेज जमा करने और चुनाव आयोग के अधिकारियों के पास बात रखने के लिए 10 दिन का अतिरिक्त समय दिया था. यह अवधि 4 दिन में पूरी हो रही है. अभी लगभग 68 लाख लोग ऐसे हैं, जिन्हें सुनवाई का मौका नहीं मिला है.

ममता ने किया अनुरोध
इसके बाद ममता बनर्जी ने जजों से अनुरोध किया कि उन्हें बोलने दिया जाए. चीफ जस्टिस ने ममता से कहा, ‘इस मामले में 19 तारीख को कपिल सिब्बल जैसे प्रसिद्ध वकील पेश हुए. आज आपके लिए श्याम दीवान जैसे योग्य वकील पेश हो रहे हैं. यह वकील बेहतर तरीके से आपका पक्ष रख सकते हैं.’

‘चुनाव आयोग ने नहीं सुनी मेरी बात’
चीफ जस्टिस की बात पर विनम्रता से ममता बनर्जी ने कहा, ‘मैं पश्चिम बंगाल से हूं. वहां की स्थानीय परिस्थितियों को समझती हूं इसलिए कोर्ट के प्रति पूरे सम्मान के साथ कुछ बातें रखना चाहती हूं. मैं अपनी लड़ाई नहीं लड़ रही हूं. लाखों-करोड़ों आम लोगों से जुड़ा मामला लेकर यहां पर आई हूं. मैंने चुनाव आयोग को 6 पत्र लिखे. अगर वह मेरी बातों को गंभीरता से लेते हुए समाधान करते तो मुझे यहां नहीं आना पड़ता.’

‘पश्चिम बंगाल को निशाना बना रहे हैं’
इसके बाद ममता ने कहा, ‘पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है. असम समेत कई राज्यों में चुनाव हैं, लेकिन वहां SIR नहीं हो रहा है. बंगाल में SIR सिर्फ मतदाताओं का नाम मिटाने के लिए किया जा रहा है. अगर किसी बेटी ने शादी के बाद अपने पति का उपनाम लगाना शुरू कर दिया है, तो उसे भी नाम का मिलान नहीं हुआ वाली श्रेणी (नेम मिसमैच) में डालकर नोटिस भेज दिया गया है.ट

चीफ जस्टिस ने कहा- ‘धन्यवाद’
ममता ने कहा कि लगभग 70 लाख लोग ऐसे ,हैं जो नेम मिसमैच श्रेणी में है. पश्चिम बंगाल में जिस तरह से उच्चारण किया जाता है, उससे नाम की स्पेलिंग में भी कई बार बदलाव हो जाता है. चुनाव आयोग के लिए राकेश द्विवेदी पेश हुए हैं. हो सकता है कि बंगाली उच्चारण के आधार पर वहां उनका उपनाम दिवेदी लिख दिया जाए.’ इस पर चीफ जस्टिस ने कहा, ‘हम यह समझ सकते हैं. आपका इस विषय को उठाने के लिए धन्यवाद. चुनाव आयोग को इसे देखना चाहिए.’

सुनवाई टालने की मांग
इस बीच चुनाव आयोग के लिए पेश एक वकील ने सुनवाई टालने का अनुरोध किया. उन्होंने कहा कि उन्हें याचिका की कॉपी अभी नहीं मिली है. चुनाव आयोग को जवाब के लिए समय दिया जाए. ममता बनर्जी ने उनकी बात काटते हुए जजों से अनुरोध किया कि उन्हें अपनी बात को पूरा करने का अवसर दिया जाए.

ममता से भिड़े आयोग के वकील
ममता ने राज्य में माइक्रो आब्जर्वर की नियुक्ति पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा, ‘सिर्फ पश्चिम बंगाल में माइक्रो आब्जर्वर नियुक्त किए गए हैं. दूसरे राज्यों से बुलाकर माइक्रो आब्जर्वर नियुक्त किए गए.’ इसका विरोध करते हुए चुनाव आयोग के लिए पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कहा, ‘कानून में इसकी व्यवस्था है. अगर राज्य सहयोग न करे तो चुनाव आयोग को बाहर से अधिकारी बुलाने पड़ते हैं. हमने क्लास 2 अधिकारी मांगे थे, जो नहीं दिए गए.’

कोर्ट ने दिया भरोसा
अपनी बात पूरी कर पाने का मौका न मिलने के आशंका को देखते हुए ममता ने कहा कि उन्हें 5 मिनट बोलने का मौका दिया जाए. इस पर चीफ जस्टिस ने कहा, ‘हम आपको 5 नहीं, 15 मिनट का समय देंगे. इसमें कोई समस्या नहीं है. हम सब चाहते हैं कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम लिस्ट से बाहर न हो.’

ममता की आखिरी दलील
जजों ने कहा कि चुनाव आयोग जवाब के लिए समय मांग रहा है. ममता के वकील याचिका की कॉपी चुनाव आयोग के वकील को दे दें. सोमवार को आयोग इस पर पक्ष रखे. अगर जरूरी हुआ तो SIR का समय बढ़ाया जा सकता है. इसके बाद ममता ने कहा कि उनकी आखिरी दलील यह है कि लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी वाले लोगों के नाम लिस्ट से नहीं हटाया जाने चाहिए. उन्हें सुधार का पूरा मौका दिया जाना चाहिए.

‘नागरिक अधिकारों की रक्षा करें’
अंत में कोर्ट ने कहा कि वह सभी पहलुओं को देखने के बाद कोई आदेश देगा. फिलहाल सुनवाई सोमवार के लिए टाली जा रही है. इसके बाद ममता ने कहा, ‘मैं सभी जजों का आभार व्यक्त करना चाहती हूं. यह लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है. इसे लेकर मैं यहां तक पहुंची हूं. आपसे अनुरोध है कि आम नागरिकों के अधिकार की रक्षा करें.’

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