UP के प्रयागराज में बिना मंजूरी शुरू हुआ गंगा ब्रिज प्रोजेक्ट, NGT ने लगाई फटकार

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  • गंगा पुल निर्माण में एनजीटी ने जताई नाराजगी, मंजूरी जरूरी।
  • नैनी-झूंसी पुल के लिए NMCG से मंजूरी न लेना था आरोप।
  • NHAI को NMCG से पहले मंजूरी लेने का निर्देश।
  • पर्यावरण मुआवजे के तौर पर अतिरिक्त वसूली का आदेश।

Ganga Bridge Project in UP:  नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में गंगा नदी पर बन रहे पुल के मामले में कड़ी नाराजगी जताई है. एनजीटी ने मामले की सुनवाई करते हुए साफ कहा है कि गंगा से जुड़े किसी भी प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले जरूरी मंजूरी लेना अनिवार्य है, वरना कार्रवाई तय है.

नैनी-झूंसी के बीच बन रहे पुल पर जरूरी मंजूरी न लेने का था आरोप

एनजीटी में यह मामला प्रयागराज के नैनी और झूंसी के बीच बन रहे पुल से जुड़ा है. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पुल निर्माण और कंक्रीट प्लांट्स का संचालन बिना जरूरी अनुमति के गंगा के फ्लडप्लेन इलाके में किया जा रहा था.

सुनवाई के दौरान NGT ने पाया कि शुरुआत में प्रोजेक्ट के लिए नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG) से मंजूरी नहीं ली गई थी. बाद में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने अनुमति हासिल की और कंक्रीट प्लांट्स के लिए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) से भी कागजी मंजूरी ली गई.

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एनजीटी ने NHAI पर जताई नाराजगी, दी भविष्य के लिए चेतावनी

NGT ने अपने आदेश में कहा कि भविष्य में NHAI को सख्ती से नियमों का पालन करना होगा और किसी भी काम से पहले NMCG की मंजूरी लेना जरूरी होगा. साथ ही UPPCB को निर्देश दिया गया है कि पुराने उल्लंघनों के लिए पर्यावरण मुआवजा तय करें. पहले लगाए गए 10 लाख रुपये के जुर्माने के अलावा अतिरिक्त वसूली भी की जाएगी, जिसे तीन महीने के भीतर पूरा करना होगा.

एनजीटी ने अधिकारियों को जांच करने का दिया निर्देश

एनजीटी ने यह भी आदेश दिया कि UPPCB, प्रयागराज के डीएम और प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों की एक संयुक्त टीम मौके पर जाकर जांच करें. अगर पर्यावरण को नुकसान पाया जाता है, तो जिम्मेदारों पर और जुर्माना लगाया जाएगा और सुधार के कदम भी तय समय में उठाने होंगे. NGT ने साफ कहा कि गंगा जैसे संवेदनशील नदी क्षेत्र में नियमों की अनदेखी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी और हर प्रोजेक्ट को तय कानूनों का पालन करना ही होगा.

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