‘इस युद्ध से हर कोई पीड़ित…’, भारत से की ईरान के प्रतिनिधि हकीम इलाही ने युद्ध रोकने की अपील

ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध को रोकने की अपील की है. उन्होंने कहा कि युद्ध की वजह से हर कोई इस इलाके में पीड़ित रहा है. यह बयान उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया है.  इलाही ने सभी देशों से अमेरिका और इजरायल से युद्ध रोकने की अपील करने को कहा है. इससे इलाके में स्थिति फिर से सामान्य हो जाए. 

उन्होंने कहा कि हमें निष्पक्षता और न्याय की आवश्यकता है. ईरान से क्यों पूछने के बजाय, हमें उन लोगों से पूछना चाहिए जिन्होंने इस युद्ध को शुरू किया है. कृपया इसे रोकें, क्योंकि हम सभी इससे पीड़ित हैं.

‘युद्ध रोकने की अपील की जाती है, तो सभी कुछ सामान्य हो जाएगा’
उन्होंने कहा कि इजरायल और अमेरिका से युद्ध रोकने की अपील की जाती है, तो फिर से सभी कुछ सामान्य हो जाएगा. उन्होंने पूछा कि यह एक स्वीकार्य और उचित है कि सभी देशों से  यह कहा जाए, कि उन्हें किसी एक विशिष्ठ  देश के साथ लेन देन करना चाहिए? उन्हें उस देश से कुछ भी नहीं खरीदना चाहिए. न ही उसके साथ कोई व्यापार करना चाहिए? हम इस तरह का जीवन क्यों जी रहे हैं? इलाही ने कहा कि ईरान ने इस युद्ध से बचने की पूरी कोशिश की, लेकिन अंत में हमें शामिल होने के लिए मजबूर होना पड़ा. 

उन्होंने कहा कि जैसा कि आप जानते हैं, कि ईरान यह युद्ध नहीं चाहता था. ईरान को इसमें शामिल होने के लिए मजबूर किया गया. ईरान ने कई बार इस संघर्ष से बचने की कोशिश की. दूसरे पक्ष को कई प्रस्ताव बी दिए. मुझे नहीं पता कि इन देशों के लोगों की क्या स्थिति है, जो दूसरों पर अपनी मर्जी थोपना चाहते हैं. 

‘वे तीन दिन में ईरान की सरकार गिराने के मकसद से आए लेकिन…’

ईरान ने ओमान में बातचीत शुरू की थी. सभी प्रतिनिधिमंडलों ने घोषणा की थी कि वे बातचीत सफल रही. उसमें कई उपलब्धियां हासिल हुईं. इसके बाद अचानक सभी कुछ जिनेवा में ट्रांसफर हो गया. यह बातचीत जारी रहनी थी. दुर्भाग्य से उन्होंने ईरान पर हमला कर दिया. इजरायल और अमेरिका ने चार साल तक इस युद्ध को तीन दिन में खत्म करने की योजना बनाई थी. उनका मानना था कि वे तीन दिनों में ईरान की सरकार को गिरा सकते हैं. उन्होंने कई देशों को जानकारी भी दी थी. वे ऐसा करेंगे. 

उनसे कहा था कि ईरान का समर्थन करने की कोई जरूरत नहीं है. तीन दिनों के बाद इस्लामिक गणराज्य का अस्तित्व ही नहीं रहेगा. उन्होंने 500 विमानों और कई मिसाइलों का इस्तेमाल किया. उन्होंने हमारे सर्वोच्च नेता, हमारे रक्षा मंत्रियों, कई कमांडरों और जनरलों को मार डाला. कई नागरिकों को मार डाला. लोगों को डराने के लिए उन्होंने लड़कियों के स्कूल पर हमला किया. इसमें 175 लड़कियां मारी गईं. कोई भी यह नहीं मान सकता कि यह कोई गलती थी. वह एक प्राइमरी स्कूल था.

इस युद्ध में चार हजार से ज्यादा नागरिक मारे जा चुके

इलाही ने कहा कि अब तक इस युद्ध में 4,000 से ज्यादा नागरिक मारे जा चुके हैं. एक लाख से ज्यादा घरों को नुकसान पहुंचाया. 4 हजार से ज्यादा बेकसूर नागरिकों को मार डाला. 50 से ज्यादा अस्पतालों और 25 विश्वविद्यालयों को नुकसान पहुंचाया है. 40,000 से ज्यादा नागरिक घायल हुए हैं. उन्होंने पुलों, सार्वजनिक स्थानों, प्रयोगशालाओं और संस्थानों को तबाह कर दिया है. वे लोगों का कोई ख्याल नहीं रख रहे थे. उनमें न कोई नैतिकता थी और न ही कोई इंसानियत. उन्होंने जिसे भी देखा, उसे मार डाला. आखिर में, उन्होंने ऐलान किया कि वे ईरानी सभ्यता को खत्म करने जा रहे हैं. यह 7,000 साल से भी ज़्यादा पुरानी है.

उन्होंने कहा कि दुश्मन बिना किसी शर्त के आत्मसमर्पण चाहते थे, लेकिन ईरान झुकने वाला नहीं है. आखिरकार, वे एक भी मकसद हासिल नहीं कर पाए. 40 दिनों तक ईरान उनके खिलाफ डटा रहा और अपना बचाव किया. हम यह जंग नहीं चाहते थे, लेकिन ईरान ने हार नहीं मानी. वे बिना किसी शर्त के सरेंडर चाहते थे, जिसे कोई भी इंसान स्वीकार नहीं कर सकता. ईरान ने कहा कि हम खुद को कुर्बान करने के लिए तैयार हैं. हम झुकने के लिए तैयार नहीं हैं. 40 दिनों के बाद, उन्हें एहसास हुआ कि वे कुछ भी हासिल नहीं कर सकते और उन्होंने सीजफायर का प्रस्ताव रखा. 

इलाही ने कहा कि अमेरिका ने 15-पॉइंट का प्लान सुझाया. ईरान ने उसे ठुकरा दिया और उसकी जगह 10-पॉइंट का प्लान सुझाया. इसे अमेरिका ने शुरू में स्वीकार करने के बाद भी मानने से इनकार कर दिया. बातचीत उन 10 पॉइंट्स पर आधारित होनी थी. इलाही ने कहा कि अब जब सीजफायर लागू है, तो अमेरिका ने ईरान आने-जाने वाले जहाजों की आवाजाही रोक दी है.सीजफायर है, लेकिन पूरी तरह से सीजफायर नहीं है. यह न जंग, न अमन वाली स्थिति है. 

उन्होंने कहा कि ईरान में हालात बहुत अच्छे हैं. लोगों में बहुत ज्यादा आध्यात्मिक भावना है. वे अपनी आम जिंदगी जी रहे हैं. वे काम कर रहे हैं. आ जा रहे हैं. सबकुछ कर रहे हैं. वे डरे हुए नहीं हैं. अपना बचाव करने के लिए तैयार हैं. लेकिन दिक्कत यह है कि ईरान को जंगी जहाजों से घेरकर और किसी भी जहाज को ईरान आने से रोककर समस्या पैदा की जा रही है.

ये भी पढ़ें: अमेरिका से भारत तक मची खलबली, कच्चे तेल ने बनाया नया रिकॉर्ड; 3 साल के हाई लेवल पर पहुंची कीमत

Leave a Comment