Coal Scam Case: कोयला ब्लॉक आवंटन केस में नहीं मिले सबूत, पूर्व सांसद विजय दर्डा समेत सभी आरोपी मुक्त

करीब एक दशक से ज्यादा समय से चल रहे चर्चित कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में रॉउज एवन्यू कोर्ट ने फैसला सुनाया. इसमें पूर्व सांसद विजय दर्डा, उनके बेटे देवेंद्र दर्डा, पूर्व कोयला सचिव एच.सी. गुप्ता समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया. अदालत ने कहा कि आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले.

कोर्ट ने कहा- सीबीआई नही पेश कर पाई सबूत 

सीबीआई की स्पेशल जज सुनेना शर्मा ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश या पद के दुरुपयोग के आरोपों को साबित करने में नाकाम रहा. अदालत ने इस मामले में कारोबारी मनोज कुमार जायसवाल और कंपनी एएमआर आयरन एंड स्टील प्राइवेट लिमिटेड को भी आरोपमुक्त कर दिया.

महाराष्ट्र के बांदर कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा है मामला 

यह मामला महाराष्ट्र के बांदर कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा था. सीबीआई ने आरोप लगाया था कि एएमआर आयरन एंड स्टील प्राइवेट लिमिटेड ने कोयला मंत्रालय को आवेदन देते समय गलत जानकारी दी थी ताकि कोयला ब्लॉक का आवंटन हासिल किया जा सके. साथ ही यह भी आरोप था कि उस समय राज्यसभा सांसद रहे विजय दर्डा ने कंपनी के पक्ष में प्रधानमंत्री कार्यालय को सिफारिशी पत्र लिखे थे. 

हालांकि अदालत में सुनवाई के दौरान इन आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत सामने नहीं आए. अदालत ने कहा कि आवेदन से जुड़ी ज्यादातर जानकारी पहले से ही संबंधित अधिकारियों के पास मौजूद थी और किसी भी गवाह ने यह पुष्टि नहीं की कि किसी तरह का दबाव, लालच या धोखा दिया गया था. 

कथित 24.6 करोड़ रुपये के लेन-देन के आरोप भी नही हो पाए-  कोर्ट 
रॉउज एवन्यू कोर्ट यह भी कहा गया कि कथित 24.6 करोड़ रुपये के लेन-देन के आरोप भी साबित नहीं हो सके. अदालत को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि इन पैसों का कोयला ब्लॉक आवंटन या विजय दर्डा द्वारा लिखे गए पत्रों से कोई संबंध था. अदालत ने साफ कहा कि यह भी साबित नहीं हुआ कि दर्डा के पत्रों का आवंटन प्रक्रिया पर कोई प्रभाव पड़ा था. इसी आधार पर अदालत ने सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया.

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