भारत का गणतंत्र दिवस सोमवार को देशभर में मनाया जाएगा. इस दिन पूरा देश राष्ट्रभक्ति की भावना से ओत-प्रोत रहता है. लेकिन अकसर लोगों में कन्फ्यूजन रहता है कि इस बार कौनसा गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा. अगर हम इतिहास पर नजर डालें तो भारत अपना इस बार 78वां नहीं, 77वां गणतंत्र दिवस सेलिब्रेट कर रहा है.
दरअसल, गणतंत्र दिवस की संख्या और बर्थ एनिवर्सरी की संख्या में अंतर होता है, इस वजह से अक्सर लोग कन्फ्यूजन का शिकार हो जाते हैं. हम बर्थडे की गिनती उसके एक साल पूरे होने पर करते हैं, वहीं, किसी दिवस की गणना उसी तारीख से तय की जाती है, जब से उसे मनाने की शुरुआत हुई थी.
कब से की जाती है गणतंत्र दिवस की गणना?
गणतंत्र दिवस की गणना 1950 से शुरू होती है. इसी वजह से 2026 का गणतंत्र दिवस 77वां होगा. यानी संविधान को अंगीकार किए इस 26 जनवरी 77 साल हो जाएंगे. हमारा संविधान अब 76 साल पुराना हो चुका है. मतलब आयोजन दिवस में साल नहीं, बल्कि यह इवेंट कितनी बार मनाया जा चुका है, इसे गिना जाता है.
26 जनवरी 1950 को क्या हुआ था?
भारत को आजादी 15 अगस्त 1947 को मिली थी. इसके तीन साल बाद यानी 26 जनवरी को भारत एक गणराज्य देश के रूप में दुनिया के सामने आया था. इस दिन भारत का गणतंत्र, गण मतलब जन और तंत्र मतलब सिस्टम, जनता का सिस्टम अपनाया था. इस दिन भारत में खुद का संविधान पूरे देश पर लागू कर दिया था.
गणतंत्र दिवस पर क्यों चुनी थी 26 जनवरी की तारीख?
26 जनवरी की तारीख चुनने के पीछे भी इतिहास है. दरअसल, 1930 में कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज का नारा बुलंद किया था. भारत इसी दिन ब्रिटिश साम्राज्य से हटकर एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में अस्तित्व में आया था. संविधान को लिखने में करीबन तीन साल से ज्यादा का समय लगा था. संविधान सभा के अध्यक्ष भीम राव अंबेडकर को बनाया गया था. तब राजेंद्र प्रसाद देश के राष्ट्रपति थे और प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे.