कांग्रेस ने मणिशंकर से ‘पंजा’ छुड़ाया, अय्यर के तीखे बयानों से पल्ला झाड़ा, खुल गए सारे राज

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने एक बार फिर पार्टी को शर्मिंदा कर दिया है. 15 फरवरी 2026 को तिरुवनंतपुरम में एक सरकारी कार्यक्रम में उन्होंने केरल के मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन की जमकर तारीफ की और भविष्यवाणी की कि वे आगामी विधानसभा चुनाव के बाद भी मुख्यमंत्री बने रहेंगे. उन्होंने कहा कि केरल ने पंचायती राज में सबसे ज्यादा प्रगति की है और कांग्रेस ने इस ‘बैटन’ को छोड़ दिया है, इसलिए विजयन को इसे उठाना चाहिए.

केरल चुनाव में कांग्रेस का कांटा बने अय्यर

मणिशंकर का बयान ऐसे समय आया है जब केरल में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं. मई 2026 में होने वाले चुनावों में कांग्रेस यूडीएफ (यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट) के तहत सत्ता वापसी की कोशिश कर रही है. अय्यर के बयानों से पार्टी में हंगामा मच गया है और कांग्रेस ने तुरंत खुद को इनसे अलग कर लिया है.

कांग्रेस ने अय्यर से पल्ला झाड़ा

 कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि पिछले कुछ सालों से इस अनुभवी नेता का पार्टी से कोई रिश्ता नहीं है और वह पूरी तरह से अपनी व्यक्तिगत क्षमता में बोलते और लिखते हैं. कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने अय्यर के बिगड़े बोल पर जवाब देते हुए कहा, ‘बीते कुछ सालों से मणिशंकर अय्यर का कांग्रेस से नाता टूटा हुआ है. वो अपनी निजी क्षमता से बोलते और लिखते हैं.’

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पवन खेड़ा की X पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए लिखा, ‘कोई संदेह न हो. केरल की जनता ज्यादा जिम्मेदार और जवाबदेह शासन के लिए यूडीएफ को सत्ता में वापस लाएगी. वे जानते हैं कि एलडीएफ और बीजेपी सीक्रेट पार्टनर हैं.’

कांग्रेस की रणनीति को अय्यर से नुकसान

अय्यर कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री और पंचायती राज मंत्री रह चुके हैं, लेकिन उनकी बेबाक टिप्पणियां अक्सर विवाद पैदा करती हैं. पार्टी ने उन्हें पहले भी निलंबित किया है. अब उनका नया बयान कांग्रेस को शर्मिंदा कर रहा हैं, खासकर केरल चुनाव से पहले जहां पार्टी UDF के तहत सत्ता वापसी की कोशिश कर रही है. अय्यर के हमले पार्टी की आंतरिक एकता पर सवाल उठाते हैं और दिखाते हैं कि बड़े नेता भी आपसी मतभेदों से जूझ रहे हैं.

ये बयान कांग्रेस की केरल चुनावी रणनीति को नुकसान पहुंचा सकते हैं. अय्यर की तारीफ से एलडीएफ को फायदा हो सकता है, जबकि कांग्रेस की आंतरिक एकता और विपक्षी छवि पर सवाल उठ रहे हैं. पार्टी ने अय्यर से बार-बार दूरी बनाई है, लेकिन उनकी टिप्पणियां पार्टी की छवि को प्रभावित करती रहती हैं.

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