फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों बुधवार (18 फरवरी 2026) को एआई समिट में भाग लेने के लिए दिल्ली पहुंचे. इस दौरान मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पीएम मोदी के साथ AI तस्वीर शेयर की है. इस एआई तस्वीर में पीएम मोदी और मैक्रों को heart का साइन बनाते नजर आ रहे हैं. उन्होंने लिखा, ‘जब दोस्त मिलते हैं तो इनोवेशन खुद-ब-खुद होता है. AI इम्पैक्ट समिट के लिए तैयार हूं.’
भारत-फ्रांस इनोवेशन ईयर मना रहे दोनों देश
भारत और फ्रांस डिफेंस, टेक्नोलॉजी, स्पेस और एनर्जी जैसे क्षेत्रों में साथ काम करते हैं. मैक्रों का यह दौरा भी इसी सहयोग को आगे बढ़ाने के लिहाज से अहम माना जा रहा है. दोनों देश साल 2026 को ‘भारत-फ्रांस इनोवेशन ईयर’ के रूप में मना रहे हैं. यह एक साल तक चलने वाली संयुक्त पहल है, जिसका मकसद दोनों देशों के बीच नई तकनीक, रिसर्च और इंडस्ट्रियल इनोवेशन में सहयोग बढ़ाना है.
When friends connect, innovation follows. Ready for The AI Impact Summit! pic.twitter.com/oh4700pQ09
— Emmanuel Macron (@EmmanuelMacron) February 18, 2026
AI रोडमैप पर काम कर रहे भारत-फ्रांस
इस इनोवेशन ईयर का फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर है. भारत और फ्रांस मिलकर एक साझा एआई रोडमैप पर काम कर रहे हैं, जिसका लक्ष्य जिम्मेदार और एथिकल एआई सिस्टम विकसित करना है. पीएम मोदी ने मंगलवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुंबई में मुलाकात की थी. दोनों ने मुंबई में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की. प्रधानमंत्री ने फ्रांस को भारत का विशेष साझेदार बताया और कहा कि दोनों देशों ने अपने रिश्तों को ‘स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ लेवल तक अपग्रेड करने का फैसला किया है.
स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का अर्थ है कि दोनों देश केवल व्यापार या हथियारों की खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि सुरक्षा, तकनीक, अंतरिक्ष, समुद्री इलाकों की सुरक्षा और बड़े वैश्विक मुद्दों पर साथ मिलकर काम करेंगे. इससे पहले दोनों देशों के बीच संबंध ‘स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ स्तर के थे.
पीएम मोदी ने भारत मंडपम में जारी ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और आईएमएफ प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा सहित दुनिया के नेताओं का स्वागत किया. इस शिखर सम्मेलन में दुनियाभर के 500 से अधिक एआई दिग्गज, करीब 100 सीईओ और फाउंडर, 150 शिक्षाविद और शोधकर्ता, 400 मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (सीटीओ), उपाध्यक्ष और चैरिटी कार्य करने वाले व्यक्ति शामिल हो रहे हैं. इसके अलावा 100 से अधिक सरकारी प्रतिनिधि भी भाग लेंगे जिनमें 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष, शासन-प्रमुख और करीब 60 मंत्री एवं उप मंत्री शामिल हैं.