पश्चिम बंगाल में प्रचंड जीत के बाद बीजेपी ने राज्य में पहली बार सरकार बनाई है. वहीं, टीएमसी 81 सीटों पर सिमट गई. टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी ने बंगाल के चुनाव परिणाम को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए थे. बनर्जी के आरोपों पर मंत्री दिलीप घोष ने करारा पलटवार किया है.
क्या बोले दिलीप घोष?
दिलीप घोष ने न्यूज एजेंसी IANS से बातचीत के दौरान अभिषेक बनर्जी के बयान को लेकर कहा कि ‘जब तक वे जीत रहे थे, तब तक सब ठीक था, ईवीएम ठीक थी और चुनाव आयोग ठीक था. अब जब वे हार गए हैं, तो कह रहे हैं कि मैनिपुलेशन हुआ है. समाज ऐसे लोगों को बर्दाश्त नहीं करता.’ कहा कि ‘महिलाओं की सुरक्षा के लिए सब कुछ लागू किया जाएगा. बंगाल में जो भी घटनाएं हुई हैं, वे भविष्य में दोबारा नहीं होनी चाहिए. हम इस पर जीरो-टॉलरेंस अप्रोच के साथ काम करेंगे.’
टीएमसी सांसद ने लगाए थे ये आरोप
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने बीते दिनों ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा था कि टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के मार्गदर्शन में लोकतंत्र, संवैधानिक मूल्यों और लोगों के अधिकारों के लिए हमारी लड़ाई जारी रहेगी. उन्होंने लिखा था कि हमने एक बेहद मुश्किल चुनाव लड़ा है, जिसमें कथित तौर पर लगभग 30 लाख असली वोटरों को वोटर लिस्ट से बाहर कर दिया गया. इस पूरी प्रक्रिया के दौरान, हमने देखा कि कई सरकारी एजेंसियों और भारत के चुनाव आयोग का रवैया कितना पक्षपातपूर्ण था.
अभिषेक बनर्जी ने लिखा था कि लोकतांत्रिक संस्थाएं जिन्हें निष्पक्ष होकर काम करना चाहिए, वे भी सवालों के घेरे में दिखीं. इससे पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता, विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
‘कतई बर्दाश्त करने लायक नहीं’
उन्होंने लिखा था कि लोकतंत्र तभी जिंदा रह सकता है, जब चुनावी संस्थाएं नागरिकों के मन में भरोसा और विश्वास जगाएं. दुर्भाग्य से, हमने जो कुछ देखा है, उसने उस भरोसे को बुरी तरह से तोड़ दिया है. इसके साथ ही चुनाव के बाद हुई हिंसा, पार्टी दफ्तरों पर हमले, हमारे पार्टी कार्यकर्ताओं को डराना-धमकाना और समर्थकों को धमकियां देना. ये सभी बातें एक लोकतांत्रिक समाज में बेहद चिंताजनक और कतई बर्दाश्त न करने के लायक हैं.
विजय होंगे तमिलनाडु के सीएम? रास्ता हुआ साफ, इन पार्टियों ने कर दिया सपोर्ट