वुमेंस रिजर्वेशन एक्ट 2023 के बाद कितनी महिलाओं को मिला चांस? कांग्रेस से हाईएस्ट 33.3% फीमेल कैंडिडेट्स, बीजेपी कहां खड़ी

21 सितंबर 2023 में संसद ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण कानून) पास किया. इसका मतलब है कि लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. यह कानून 20 अप्रैल 2026 को गजट में नोटिफाई हो चुका है, लेकिन लोकसभा में पास नहीं हुआ क्योंकि पहले देशव्यापी जनगणना और परिसीमन जरूरी है. इसका असल फायदा 2029 के आसपास के चुनावों में मिलेगा. इस बीच यह जानना जरूरी है कि बीते 3 सालों में राजनीतिक पार्टियों ने टिकट वितरण में महिलाओं की हिस्सेदारी कितनी बढ़ा दी? जानते हैं एक्सप्लेनर में…

सवाल 1: कानून बनने के बाद पार्टियों ने महिलाओं को टिकट देने में कितनी बढ़ोतरी की?    
जवाब: महिला आरक्षण कानून बनने के बाद महिलाओं को टिकट देने में बहुत धीमी और मामूली बढ़ोतरी हुई. ज्यादातर पार्टियां अभी भी बहुत कम महिलाओं को मैदान में उतार रही हैं. कई राज्यों में तो टिकटों की संख्या पहले से कम हो गई. कुल मिलाकर 38 बार पार्टियों ने महिलाओं का अनुपात बढ़ाया, लेकिन 24 बार घटाया भी है. सिर्फ 10 बार ही 5 प्रतिशत पॉइंट या उससे ज्यादा बढ़ोतरी हुई. कुछ छोटे मामलों को छोड़कर कोई पार्टी अभी 30% से ज्यादा नहीं पहुंची.

सवाल 2: इस साल पोल-बाउंड राज्यों में हालत क्या है?
जवाब: असम, केरल, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में ज्यादातर पार्टियों ने सिर्फ थोड़ी बहुत बढ़ोतरी की या कुछ ने कम कर दी है.

  • पश्चिम बंगाल (2026 चुनाव): कांग्रेस ने 35 महिलाओं को टिकट दिए, जो 2021 में सिर्फ 7 थे. लेकिन 2021 में कांग्रेस सिर्फ 92 सीटों पर लड़ रही थी, अब 294 पर. इसलिए प्रतिशत 7.6% से बढ़कर 11.9% हो गया. TMC ने 52 महिलाएं उतारीं हैं, जो 2021 में 48 थीं. TMC का प्रतिशत 16.55% से बढ़कर 17.86% हो गया. BJP ने 5 टिकट कम कर दिए. यानी 38 से घटाकर 33.
  • तमिलनाडु: DMK ने 2021 में 14 महिलाओं को टिकट दिया था और अब 19 महिलाएं कैंडिडेट हैं. AIADMK से 2021 में 17 महिलाएं कैंडिडेट थीं और अब 19 हैं. दोनों का प्रतिशत करीब 11%.
  • केरल: BJP और कांग्रेस ने 2021 से कम महिलाएं दीं. CPI(M) में थोड़ी बढ़ोतरी हुई. BJP का प्रतिशत 13.9% से 14.3%, कांग्रेस 10.8% से 9.9% (घट गया), CPI(M) 14.7% से 15.6%.
  • असम: कांग्रेस ने 13 (2021 में 9) कैंडिडेट्स उतारे जो 13.3% बढ़ोतरी है, जबकि BJP ने 6 (2021 में 7) महिलाओं को मौका दिया, जो सिर्फ 6.7% है.

सवाल 3: बड़े राज्य चुनावों में पार्टियों का रिकॉर्ड क्या है?
जवाब: 2023 के कानून के बाद के चुनावों में सिर्फ 6 बार किसी पार्टी ने 20% से ज्यादा महिलाओं को टिकट दिए:

  • सिक्किम चुनाव 2024: कांग्रेस ने 33.3% ज्यादा महिलाओं को टिकट दिए.
  • झारखंड चुनाव 2024: AJSU का 30% रहा था.
  • ओडिशा चुनाव 2024: BJD ने 23.8% महिलाओं पर भरोसा जताया.
  • झारखंड चुनाव 2024: कांग्रेस ने 23.3% महिलाओं को मौका दिया.
  • केरल चुनाव 2026: CPI ने 20.8% महिलाओं को मौका दिया है.
  • छत्तीसगढ़ चुनाव 2023: कांग्रेस ने 20% महिलाओं को टिकट दिया.

BJP का सबसे अच्छा प्रदर्शन झारखंड में 17.6% और छत्तीसगढ़ में 16.7% रहा. पहले इसका हाईएस्ट 15.6% (छत्तीसगढ़ 2018) और 15.4% (मिजोरम) था. BJP का सबसे ज्यादा इजाफा झारखंड में 8.8 प्रतिशत पॉइंट हुआ, लेकिन आंध्र प्रदेश में 7.5 प्रतिशत पॉइंट गिरावट आई. पुडुचेरी में BJP ने 2024 और 2021 दोनों में कोई महिला उम्मीदवार नहीं उतारीं थीं. कांग्रेस का सिक्किम, झारखंड, छत्तीसगढ़ और अरुणाचल में रिकॉर्ड अच्छा रहा है.

सवाल 4: महिलाओं के लिए स्कीम चलाने वाली पार्टियों ने क्या किया?
जवाब: जहां पार्टियों ने महिलाओं के लिए कैश ट्रांसफर स्कीम चलाईं या वादा किया, वहां टिकट थोड़े बढ़े. जैसे मध्य प्रदेश (2023), महाराष्ट्र (2024) और बिहार (2025) में. लेकिन बिहार में नीतीश कुमार की JD(U) ने महिलाओं के टिकट का प्रतिशत घटा दिया, भले ही उनका पूरा अभियान महिलाओं पर केंद्रित था.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पार्टियां अभी भी पुरानी सोच में हैं. वे महिलाओं को सिर्फ ‘सुरक्षित’ या कम जोखिम वाली सीटों पर टिकट दे रही हैं. कोई भी पार्टी 33% का लक्ष्य नहीं रख रही. कानून अभी लागू नहीं होने के कारण कोई मजबूरी नहीं है. नतीजतन, 38 बार बढ़ोतरी हुई, लेकिन 24 बार तो घटाव हो गया.

सवाल 5: आम लोगों, महिलाओं और राजनीति पर इसका क्या असर पड़ रहा है?
जवाब: पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स रशीद किदवई कहते हैं कि कानून का मकसद महिलाओं को बराबरी का मौका देना था, लेकिन अभी स्वेच्छा से बहुत कम हुआ. 2024 लोकसभा में सिर्फ 14% महिलाएं सांसद बनीं. राज्य विधानसभाओं में औसतन 9-10% से ज्यादा नहीं है. इससे महिलाओं का राजनीति में प्रतिनिधित्व कम रह गया. आम लोग देख रहे हैं कि बड़े-बड़े वादे के बावजूद पार्टियां महिलाओं को टिकट देने में पीछे हैं. इससे राजनीति में महिलाओं का विश्वास और भागीदारी प्रभावित हो रही है.

रशीद किदवई ने कहा, ‘2029 के आसपास जब परिसीमन के बाद कानून पूरी तरह लागू होगा, तब 33% आरक्षण मजबूरी बन जाएगा. तब पार्टियों को महिलाओं को टिकट देना पड़ेगा. अभी की मामूली बढ़ोतरी सिर्फ शुरुआती संकेत है. अगर पार्टियां अभी से तैयारी करें तो बड़ा बदलाव आ सकता है, लेकिन फिलहाल पार्टियां महिलाओं को टिकट देने में बहुत धीमी हैं.’

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