ममता बोली CM पद से नहीं दूंगा इस्तीफा तो संबित पात्रा ने अंबेडकर की याद दिला जानें क्या कहा

West Bengal Election Results 2026: पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बावजूद ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी हार के पीछे प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और चुनाव आयोग की भूमिका रही है. ममता बनर्जी ने स्पष्ट कहा कि वह लोकभवन जाकर इस्तीफा नहीं देंगी, क्योंकि उनके अनुसार वे वास्तव में चुनाव नहीं हारी हैं.

उनके इस बयान की भाजपा ने कड़ी आलोचना की है. भाजपा नेता संबित पात्रा ने इसे चिंताजनक और हास्यास्पद बताया. उन्होंने कहा कि भारत विश्व में लोकतंत्र के लिए जाना जाता है और ऐसा बयान संविधान की भावना के खिलाफ है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अन्य नेताओं ने हार के बाद शांति से इस्तीफा दिया है, लेकिन ममता बनर्जी का रुख “एंटाइटलमेंट” को दर्शाता है.

संबित पात्रा ने दिलाई अंबेडकर की याद

संबित पात्रा ने आगे कहा कि भारतीय लोकतंत्र में कोई भी नेता अपरिहार्य नहीं है और यह सोच गलत है कि किसी एक व्यक्ति के बिना सरकार नहीं चल सकती. उन्होंने ममता बनर्जी के इस बयान पर भी सवाल उठाया कि वे विधानसभा नहीं जाएंगी, और कहा कि ऐसा सोचना ही अनुचित है. साथ ही, उन्होंने ‘इंडी गठबंधन’ पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह केवल दिखावे का गठबंधन है, जहां नेता एक-दूसरे के खिलाफ ही बोलते रहते हैं.

भाजपा नेता ने ममता बनर्जी के बयान को “अराजक” करार देते हुए कहा कि नैतिक जीत का दावा अलग बात है, लेकिन आधिकारिक परिणामों का सम्मान करना जरूरी है. उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान में स्पष्ट प्रावधान हैं और उसी के अनुसार सत्ता का हस्तांतरण होना चाहिए. उनके अनुसार, हार स्वीकार न करना तानाशाही प्रवृत्ति को दर्शाता है और लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है.

ममता ने क्या-क्या लगाये आरोप?

ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया है. उन्होंने चुनाव परिणाम को “जनादेश नहीं बल्कि एक साजिश” बताया और आरोप लगाया कि उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस की हार निष्पक्ष तरीके से नहीं हुई. ममता बनर्जी ने कहा कि उन्हें इस्तीफा देने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि उनके अनुसार “हम हारे नहीं हैं, बल्कि मतों की लूट हुई है.”

उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान और मतगणना प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं. उनका दावा है कि लगभग 100 सीटों पर जनादेश “लूट” लिया गया और जानबूझकर मतगणना की गति धीमी रखी गई. उन्होंने यह भी कहा कि उनकी लड़ाई भारतीय जनता पार्टी से नहीं, बल्कि निर्वाचन आयोग से थी, जो कथित रूप से भाजपा के पक्ष में काम कर रहा था.

चुनाव में भाजपा ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया और राज्य में 15 साल से चल रहे टीएमसी शासन का अंत कर दिया. इसके बावजूद ममता बनर्जी ने कहा कि वे इस परिणाम को स्वीकार नहीं करेंगी और संवैधानिक विकल्पों पर विचार कर रही हैं.

रणनीतिक बदलाव का संकेत देते हुए ममता बनर्जी ने अब राष्ट्रीय राजनीति पर ध्यान केंद्रित करने और विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन को मजबूत करने की बात कही. उन्होंने बताया कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव और हेमंत सोरेन जैसे नेताओं ने उनसे संपर्क कर समर्थन जताया है. साथ ही, उन्होंने आंदोलनकारी रुख अपनाने की घोषणा करते हुए कहा कि अब वह “सड़कों पर उतरकर लड़ाई लड़ेंगी.” उन्होंने चुनाव के बाद हुई हिंसा की जांच के लिए 10 सदस्यीय समिति बनाने का भी ऐलान किया और प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने की बात कही.

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