Explained: सम्राट चौधरी ‘बाहरी नेता’, मोहन यादव के दिल में बसता संघ! हिंदी राज्यों में BJP-RSS का CM पैटर्न क्या?

हिंदी राज्यों में BJP की सत्ता अक्सर RSS की संगठनात्मक मजबूती और हिंदुत्व की राजनीति के मिश्रण से चलती रही है. 2026 तक के ताजा आंकड़ों के अनुसार, ज्यादातर हाल के CM RSS या ABVP के ‘संगठन के आदमी’ हैं, जो शाखा, छात्र आंदोलन, राम मंदिर या कश्मीर आंदोलन से निकले हैं, लेकिन योगी आदित्यनाथ जैसे कुछ हिंदुत्व के अपने ब्रांड से उभरे जो RSS प्रचारक नहीं हैं, जबकि सम्राट चौधरी जैसे अपवाद हैं. कोई RSS बैकग्राउंड नहीं, सिर्फ पार्टी और जातीय समीकरण. एक्सप्लेनर में समझते हैं BJP-RSS का पैटर्न…

सवाल 1: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में RSS या हिंदुत्व का दखल क्या है?
जवाब: इन तीनों राज्यों में 2023 विधानसभा चुनाव जीत के बाद बने CM पूरे RSS परिवार से हैं:

  • मध्य प्रदेश: 13 दिसंबर 2023 को डॉ. मोहन यादव मुख्यमंत्री बने. उज्जैन के मोहन यादव OBC समाज से आते हैं. वे 1982 में माधव विज्ञान महाविद्यालय में छात्र संघ के संयुक्त सचिव बने और 1984 में अध्यक्ष बन गए. 1986-97 तक RSS की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के विभिन्न पदों पर रहे. 1990-92 तक ABVP के राष्ट्रीय सचिव रहे. 1993-95 में RSS में उज्जैन शहर के सह-खंड कार्यवाह बने और 1997 में BJP युवा मोर्चा MP कार्यसमिति सदस्य बने. 2021 में उच्च शिक्षा मंत्री रहते रामचरितमानस को BA फर्स्ट ईयर में फिलॉसफी का वैकल्पिक विषय बनाने का ऐलान किया. वे RSS और हिंदुत्व दोनों का हाथ थामे हैं. उन्होंने 5 फरवरी 2026 को कहा, ‘हिंदुत्व ही राष्ट्रभावना का सार है और भारत इस पर गर्व करता है.’
  • छत्तीसगढ़: 13 दिसंबर 2023 को विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ के पहले आदिवासी CM बने. 1989 में गांव बगिया में पंच बने और 1990 में निर्विरोध सरपंच चुने गए. फिर MLA, सांसद, BJP राज्य अध्यक्ष और फिर केंद्रीय मंत्री बने. विष्णु देव RSS के सदस्य हैं और संगठन फ्रंटहेंड खेलते हैं. 10 दिसंबर 2023 को BJP विधायक दल ने उन्हें नेता चुना था. अमित शाह ने कुनकुरी में कहा था, ‘अगर BJP जीती तो विष्णु देव साय को बड़ा आदमी बनाएंगे.’ वे कम बोलने वाले ग्रासरूट लीडर हैं. RSS बैकिंग है और आदिवासी पहचान है.
  • राजस्थान: 12 दिसंबर 2023 को RSS और हिंदुत्व आइकॉन भजन लाल शर्मा मुख्यमंत्री बने. वे स्कूल के दिनों से ही ABVP से जुड़ गए थे. 1990 में ABVP के कश्मीर बचाओ आंदोलन में श्रीनगर मार्च के दौरान उधमपुर में गिरफ्तार हुए थे. फिर 1992 में राम जन्मभूमि आंदोलन में गिरफ्तारी हुई. 34 साल BJP और RSS में ‘संगठन का आदमी’ बनकर काम किया, लेकिन लो प्रोफाइल रहे. 2023 में BJP ने CM बना दिया. चुनावी रैलियों में भजन लाल ने कहा था, ‘श्री राम से लड़ने वाले को याद रखना चाहिए.’

 

BJP ने मोहन यादव को चौथी लाइन से उठाकर मध्य प्रदेश का CM बनाया था
BJP ने मोहन यादव को चौथी लाइन से उठाकर मध्य प्रदेश का CM बनाया था

सवाल 2: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का RSS-हिंदुत्व से क्या लेना-देना रहा?
जवाब: इन दो राज्यों के CM की हिंदुत्व छवि इतनी मजबूत है कि इनमें से एक संघ के न होते हुए भी संघीय लगते हैं:

योगी आदित्यनाथ 17 मार्च 2017 को उत्तर प्रदेश के CM बने. वे गोरखनाथ पीठ के महंत हैं, लेकिन RSS प्रचारक नहीं हैं. यानी वे नागपुर की शाखा संस्कार से नहीं गुजरे, बल्कि हिंदुत्व को अपना ब्रांड ‘हिंदू हृदय सम्राट’ बना दिया. 2002 में हिंदू युवा वाहिनी बनाई. 2017 में BJP की भारी जीत के बाद CM बने और पांच बार गोरखपुर से विधायक रह चुके हैं. RSS अब उन्हें सपोर्ट करता है लेकिन वे ‘बाहरी’ माने जाते हैं. 2017 में उन्होंने कहा था, ‘अगर एक हिंदू लड़की मुस्लिम से शादी करती है तो हम 100 मुस्लिम लड़कियों को वापस लेंगे. अगर वे एक हिंदू को मारेंगे तो हम 100 मारेंगे.’ इसके बाद ‘राम नाम सत्य है’ कहकर लव जिहाद करने वालों को चेतावनी दी. हिंदुत्व की राजनीति से नेता बने, RSS संगठन से नहीं.

 

योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ पीठ के महंत हैं
योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ पीठ के महंत हैं

पुष्कर सिंह धामी 4 जुलाई 2021 को उत्तराखंड के CM बने. थाकुर समुदाय के धामी 1990 से RSS से जुड़े हैं. वे कुल 33 साल संघ, ABVP और सहयोगी संगठनों से जुड़े हैं. 2002 में BJP युवा मोर्चा अध्यक्ष बने. 2021 में तीरथ सिंह रावत के इस्तीफे के बाद CM की कुर्सी मिली. 27 जनवरी 2025 को यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने वाले पहले भारत में पहले CM बने. धामी ने UCC पर कहा, ‘यह देवभूमि उत्तराखंड में सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों का नया युग शुरू करेगी.’

सवाल 3: बिहार में सम्राट चौधरी RSS के हैं या सिर्फ हिंदुत्व की राजनीति का सहारा है?
जवाब: बिहार के पहले BJP CM सम्राट चौधरी कुशवाहा (OBC) से आते हैं. वे 1999 में RJD की राबड़ी सरकार में मंत्री रह चुके हैं. 2005 के बाद जदयू में शामिल हुए और फिर 2017 में BJP जॉइन कर ली. यानी कोई पारंपरिक RSS बैकग्राउंड नहीं है. ‘लव-कुश’ समीकरण और OBC आउटरीच के लिए चुने गए. मार्च 2026 में नीतीश कुमार ने राज्‍यसभा जाने का ऐलान किया और 15 अप्रैल 2026 को सम्राट चौधरी ने शपथ ले ली. वे मोदी-शाह के करीबी माने जाते हैं, लेकिन RSS से कोई ताल्लुक नहीं है.

 

सम्राट चौधरी BJP में बाहर के नेता हैं
सम्राट चौधरी BJP में बाहर के नेता हैं

सवाल 4: झारखंड, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली में BJP के पुराने CM RSS-हिंदुत्व से कैसे जुड़े?
जवाब: तीनों प्रदेशों में BJP के पुराने CM की कहानी RSS की संगठनात्मक जड़ों और हिंदुत्व की विचारधारा के मिश्रण से भरी हुई है, जहां कुछ नेता RSS के सीधे कार्यकर्ता रहे तो कुछ हिंदुत्व की राजनीति के चेहरे बने. रेखा गुप्ता के आने के साथ दिल्ली में यह पैटर्न फिर से मजबूत हो गया:

  • दिल्ली: BJP के पुराने तीन मुख्यमंत्रियों मदन लाल खुराना (1993-1996), साहिब सिंह वर्मा (1996-1998) और सुषमा स्वराज (1998) में साहिब सिंह वर्मा RSS से सबसे सीधे जुड़े थे. वे RSS में सक्रिय रहे, फिर जनता पार्टी और BJP में आए. मदन लाल खुराना को ‘दिल्ली का शेर’ कहा जाता था. वे जनसंघ के पुराने नेता थे और हिंदुत्व की मजबूत राजनीति के प्रतीक बने, हालांकि RSS प्रचारक नहीं थे. सुषमा स्वराज भी हिंदुत्व की मुखर चेहरा रहीं और पार्टी की विचारधारा से पूरी तरह जुड़ी रहीं. अब 27 साल बाद, फरवरी 2025 में रेखा गुप्ता दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं, जो ABVP से 1992 में जुड़ीं थीं. DUSU की प्रेसिडेंट बनीं और 30 साल से RSS की सदस्य हैं.
  • हिमाचल प्रदेश: पुराने BJP मुख्यमंत्रियों में शांता कुमार शामिल हैं, जो 1977-80 में जनता पार्टी से जुड़े थे, बाद में BJP जॉइन की. प्रेम कुमार धूमल (1998-2003 और 2008-12) RSS की संगठनात्मक राजनीति से अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े थे. शांता कुमार जनसंघ के शुरुआती दौर के नेता थे और BJP के राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय रहे, लेकिन वे RSS के पूर्णकालिक प्रचारक नहीं थे. प्रेम कुमार धूमल ABVP की पृष्ठभूमि से निकले और युवा मोर्चा में काम किया, पर उनका फोकस पार्टी संगठन पर ज्यादा था. दोनों ने हिंदुत्व की BJP लाइन को अपनाया, लेकिन RSS की शाखा संस्कार से सीधा जुड़ाव कम था.
  • झारखंड: पुराने BJP मुख्यमंत्रियों बाबूलाल मरांडी (2000-2003), अर्जुन मुंडा और रघुबर दास (2014-2019) में बाबूलाल मरांडी RSS से सबसे गहरे जुड़े थे. बचपन में ही RSS से जुड़ गए, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के जरिए राम जन्मभूमि आंदोलन में सक्रिय रहे और वनवासी कल्याण आश्रम जैसे RSS के सहयोगी संगठनों के साथ काम किया. अर्जुन मुंडा और रघुबर दास हिंदुत्व की राजनीति के जरिए उभरे, जहां आदिवासी-गैर आदिवासी समीकरण के साथ BJP की विचारधारा को आगे बढ़ाया, लेकिन मरांडी जितना प्रत्यक्ष RSS बैकग्राउंड उनके पास नहीं था.

सवाल 5: कुल मिलाकर हिंदी बेल्ट राज्यों में BJP-RSS का पैटर्न क्या है?
जवाब: पॉलिटिकल एक्सपर्ट रशीद किदवई कहते हैं कि हिंदी बेल्ट में BJP की सत्ता का सबसे बड़ा पैटर्न यह है कि RSS संगठन की मजबूत पृष्ठभूमि वाले ‘संगठन के आदमी’ ज्यादातर राज्यों में मुख्यमंत्री बनाए जाते हैं, जबकि हिंदुत्व की विचारधारा सबको एक सूत्र में बांधती है. RSS शाखा, ABVP छात्र राजनीति, राम जन्मभूमि-कश्मीर आंदोलन या VHP जैसे सहयोगी संगठनों से निकले नेता BJP की पहली पसंद रहते हैं, लेकिन जहां जरूरी हो, वहां हिंदुत्व के मजबूत चेहरे या जातीय समीकरण को तरजीह दी जाती है. जैसे योगी आदित्यनाथ और सम्राट चौधरी. 2026 तक के ताजा आंकड़ों में यह पैटर्न और साफ दिखता है. RSS संगठन की स्थिरता देता है, हिंदुत्व विचारधारा की आग और मोदी-शाह की रणनीति जाति-क्षेत्र बैलेंस करती है.’

Explained: सम्राट चौधरी 'बाहरी नेता', मोहन यादव के दिल में बसता संघ! हिंदी राज्यों में BJP-RSS का CM पैटर्न क्या?

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