एबीपी न्यूज के इवेंट आईडिया ऑफ इंडिया समिट के दूसरे दिन फिल्म डायरेक्टर क्रिस्टो टॉमी, तितली के डायरेक्टर कानू बहल और निर्देशक अरानया सहाय ने शिरकत की. यहां उन्होंने “हाउ टू विन व्यूअर्स – द डायरेक्टर्स कट” टाइटल वाले सेशन में बात की. इस डिस्कशन को एक्टर गुल पनाग ने मॉडरेट किया.
कहानी कहने में बैलेंस जरूरी
अरण्य सहाय ने कहानी कहने में बैलेंस की ज़रूरत पर ज़ोर दिया. उनके मुताबिक, फ़िल्म बनाने वालों को हर बार कुछ अलग बनाने की कोशिश करनी चाहिए, साथ ही यह भी पक्का करना चाहिए कि कहानी इतनी जानी-पहचानी लगे कि दर्शक उससे जुड़ सकें. हालांकि, कनु बहल ने एक अलग नज़रिया पेश किया. उन्होंने कहा, “जब आप लिखें तो दर्शकों के बारे में न सोचें,” और कहा कि वह खुद को अपने काम का पहला दर्शक मानते हैं.
क्रिस्टो टॉमी ने कहा कि फिल्ममेकर अक्सर फिल्म स्कूल से एक आइडियलिस्टिक सोच के साथ निकलते हैं, लेकिन उन्हें ऑडियंस की जगह और उम्मीदों को समझना चाहिए. उन्होंने कहा, “ऑडियंस भगवान है,” और ऑडियंस से जुड़े रहने की इंपॉर्टेंस पर ज़ोर दिया.
कोविड के बाद के दौर को बताया चैलेंजिंग
फिल्म डायरेक्टर क्रिस्टो टॉमी ने कोविड के बाद के दौर की बात की और कहा, ‘कोविड के बाद का वक्त चुनौती भरा रहा. लोगों को सिनेमाघरों तक पहुंचने में काफी वक्त लगा. लोग थियेटर में जाना नहीं चाहते थे.’
खुद को सोचकर फिल्में लिखते हैं कानू बहल
फिल्म डायरेक्टर कानू बहल ने बताया कि वे खुद को ध्यान में रखकर फिल्में लिखते हैं. उन्होंने कहा, ‘जब मैं फिल्में लिखता हूं तो मैं सबसे पहले खुद को सोचकर लिखता हूं. क्या मैं अपनी लिखी फिल्म में दिलचस्पी दिखा रहा हूं, यह मैं सबसे पहले सोचता हूं. मैं बाहर के लोगों को लेकर बहुत ज्यादा नहीं सोचता हूं.’
फिल्मों में AI के इस्तेमाल पर क्या बोले अरण्य सहाय
आजकल फिल्मों में हो रहे एआई के इस्तेमा को लेकर अरण्य सहाय ने अपनी राय रखी. उन्होने कहा,, ‘मैं नहीं चाहता हूं कि एआई का बहुत ज्यादा प्रभाव फिल्मों पर आए, हालांकि दूसरा साइड ये है कि उसका फायदा भी है. जब से मैंने फिल्मों पर काम करना शुरू किया तब से यह समझा हूं कि एआई की वजह से काफी कुछ एलगोरिदम के मामले में बेहतर हो सकता है. मैं इसको लेकर ज्यादा होपफुल हूं.’