कोलकाता ईडी ने 10 अप्रैल को को कोलकाता, बोंगांव, रानीगंज, मुर्शिदाबाद और हाबरा में स्थित 17 परिसरों पर पीएमएलए के तहत सर्च ऑपरेशन चलाया. ये परिसर निरंजन चंद्र साहा और अन्य से पीडीएस घोटाले के मामले में जुड़े हुए थे. तलाशी के दौरान 30.9 लाख रुपये नकद, आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए.
ईडी ने इस मामले में जांच मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल पुलिस की एफआईआर संख्या 1150/2020 दिनांक 23.10.2020 के आधार पर शुरू की. यह सीमा शुल्क उपायुक्त, घोजाडांगा एलसीएस की शिकायत पर बसीरहाट पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी.
पीडीएस गेंहूं के गबन के आरोपों के तहत जांच
एफआईआर में कल्याणकारी योजनाओं के लिए निर्धारित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के गेहूं के बड़े पैमाने पर गबन का आरोप लगाया गया था. एफआईआर में आईपीसी की धारा 379/411/120बी और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 7(i)(a)(ii) के तहत दंडनीय अपराधों का खुलासा हुआ.
आरोप था कि सार्वजनिक वितरण विभाग (पीडीएस) के गेहूं की अवैध खरीद की गई. सरकारी/एफसीआई चिह्नों वाले बोरे उलट-पलट कर धोखाधड़ी से उसकी पैकिंग की गई. घोजाडांगा एलसीएस के माध्यम से बांग्लादेश को निर्यात किया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ और आरोपियों को अनुचित लाभ प्राप्त हुआ.
इन लोगों की पुलिस ने की गिरफ्तारी
पुलिस की जांच के दौरान निरंजन चंद्र साहा, सहाबुद्दीन एसके और साहिदुर रहमान को गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 379/411/413/414/120B और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 7(i)(a)(ii) के तहत दंडनीय अपराधों के लिए आरोपी व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है.
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जांच में निर्यातकों, थोक विक्रेताओं, आपूर्तिकर्ताओं, परिवहनकर्ताओं, कमीशन एजेंटों और अन्य मध्यस्थों की संलिप्तता वाली एक गहरी और सुनियोजित आपराधिक साजिश का खुलासा हुआ है. यह कई जिलों में सक्रिय थी और जिसके अंतरराज्यीय प्रभाव थे.
175 ट्रकों में लदे गेहूं को किया जब्त
लगभग 175 ट्रकों में लदे लगभग 5101.25 मीट्रिक टन सार्वजनिक वितरण विभाग (पीडीएस) गेहूं को विभिन्न पार्किंग स्थलों से जब्त किया गया. बड़ी संख्या में चालान, बिल, ट्रक दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड जब्त किए गए. इन दस्तावेजों के सत्यापन से यह सिद्ध हुआ कि इनमें से अधिकांश दस्तावेज धोखाधड़ी से तैयार किए गए थे. इनमें सही वाहन संख्या, थोक विक्रेताओं के लाइसेंस विवरण, जीएसटी संख्या और प्रामाणिक लेनदेन रिकॉर्ड जैसी आवश्यक जानकारियों का अभाव था. इससे स्पष्ट रूप से यह संकेत मिलता है कि इन्हें जानबूझकर वैध व्यापार का झूठा आभास देने के लिए बनाया गया था.
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ईडी ने की तलाशी तो हुए चौंकाने वाले खुलासे
ईडी की तलाशी के दौरान यह पता चला कि आरोपियों ने जनवितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों के लिए निर्धारित गेहूं को अवैध रूप से हस्तांतरित करने के लिए एक सुनियोजित कार्यप्रणाली अपनाई थी.
आपूर्तिकर्ताओं, लाइसेंस प्राप्त वितरकों, डीलरों और बिचौलियों की मिलीभगत से अनधिकृत चैनलों के माध्यम से गेहूं कम कीमतों पर खरीदा गया था.
आपूर्ति श्रृंखला से बड़ी मात्रा में गेहूं को अवैध रूप से हस्तांतरित किया गया. कई स्थानों पर एकत्रित किया गया. इसकी उत्पत्ति को छिपाने के लिए, आरोपियों ने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और राज्य सरकार के चिह्नों वाले मूल बोरे हटा दिए या उलट दिए. उन्हें फिर से भर दिया, जिससे पहचान संबंधी चिह्नों को छिपाया जा सके.
पीडीएस गेहूं को वैध स्टॉक के रूप में खुले बाजार में बिक्री या निर्यात के लिए पेश किया जा सके, जिसके परिणामस्वरूप आरोपियों ने अनुचित लाभ कमाया और अपराध की आय अर्जित की. तलाशी के परिणामस्वरूप 30.9 लाख रुपये नकद और धन शोधन के अपराध से संबंधित विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए.