भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने महाराष्ट्र के फलटन स्थित ‘द यशवंत सहकारी बैंक’ के पास पर्याप्त पूंजी और आय की संभावनाएं नहीं होने के आधार पर उसका लाइसेंस रद्द कर दिया है. केंद्रीय बैंक ने मंगलवार (19 मई) को बयान में कहा कि यह सहकारी बैंक, बैंकिंग विनियमन अधिनियम के कुछ प्रावधानों का पालन करने में विफल रहा है और मौजूदा वित्तीय स्थिति में वह अपने जमाकर्ताओं को पूरी राशि लौटाने में सक्षम नहीं है.
इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने महाराष्ट्र के सहकारिता आयुक्त एवं पंजीयक से बैंक को बंद करने और परिसमापक नियुक्त करने का अनुरोध किया है. आरबीआई ने कहा कि परिसमापन पर बैंक के जमाकर्ताओं को जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम (डीआईसीजीसी) के तहत अधिकतम पांच लाख रुपये तक की बीमा राशि मिलेगी.
बैंक में जमा पैसों का क्या होगा
आरबीआई के अनुसार, बैंक के 99.02 प्रतिशत जमाकर्ताओं को उनकी पूरी जमा राशि मिलने की पात्रता है. डीआईसीजीसी 20 अप्रैल, 2026 तक 106.96 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है. आरबीआई ने कहा कि यह सहकारी बैंक 19 मई, 2026 को कारोबार बंद होने के साथ ही बैंकिंग गतिविधियां संचालित करना बंद कर देगा.
आरबीआई पहले भी कई बैंकों के लाइसेंस कर चुका है रद्द
आरबीआई ने इससे पहले भी कई बैंकों के लाइसेंस कैंसिल किए हैं. उसने कर्नाटक के द कारवार अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड का भी लाइसेंस कैंसिल किया था. यह बैंक पिछले साल जुलाई में बंद हुआ था. वहीं पेटीएम पेमेंट्स बैंक को लेकर भी काफी चर्चा हुई थी. आरबीआई ने कई नियमों के उल्लंघन की वजह से पेटीएम बैंक का लाइसेंस रद्द किया था.
बैंकों के अलावा, आरबीआई ने हाल ही में बड़ी संख्या में NBFCs (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों) के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (CoR) भी रद्द किए हैं. मई 2026 में बड़ी कार्रवाई करते हुए आरबीआई ने देश भर की लगभग 150 NBFC कंपनियों के लाइसेंस रद्द किए थे. इनमें से सबसे अधिक कंपनियां दिल्ली (करीब 67) और पश्चिम बंगाल (करीब 75) से थीं.
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