पश्चिम बंगाल में मिली प्रचंड जीत के साथ ही बीजेपी ने मिशन पंजाब शुरू कर दिया है. पश्चिम बंगाल की तरह ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की जोड़ी पंजाब में पार्टी को पहली बार जीत दिलाने उतरेगी. जहां एक तरफ प्रधानमंत्री का चेहरा और सिख समुदाय के लिए उनके द्वारा किए गए कामों का पार्टी प्रचार करेगी तो वहीं दूसरी और गृह मंत्री अमित शाह की चाणक्य नीति से पंजाब को भगवामय करने का प्लान बनाया गया है.
पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 2 सीटों पर जीत मिली थी और 6.6 प्रतिशत वोट मिले थे. इसके बाद लोकसभा चुनाव में भले ही बीजेपी एक भी सीट नहीं जीत पाई हो लेकिन 18 प्रतिशत से ज्यादा वोट पार्टी को मिला था. इससे पार्टी खासी उत्साहित है. पार्टी ने पंजाब में अकेले चुनाव लड़ने की रणनीति तैयार की है. इसको लेकर प्रदेश भर के अंदर बूथ स्तर तक टीम बनाकर वहां संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर प्रचार और सरकार को घेरने की रणनीति तेज कर दी है.
अलग है पंजाब की पॉलिटिक्स
बीजेपी ने पंजाब में अपनी रणनीति को जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है. इसकी शुरुआत आम आदमी पार्टी के 7 सांसदों को पार्टी में शामिल कराने से कर दी गई है लेकिन पंजाब में पार्टी की राह आसान नहीं है. पंजाब की पॉलिटिक्स अलग है क्योंकि यहां ध्रुवीकरण जैसे मुद्दे नहीं चल पाते. बीजेपी ने युवा महिला, दलित और ओबीसी को लेकर पंजाब में अलग अलग प्लान बनाया है.
किन मुद्दों पर AAP को घेरेगी BJP
पंजाब में नशे का कारोबार बहुत फैला हुआ है और वहां के युवा सबसे ज्यादा इसकी चपेट में हैं. अब इस मुद्दे को लेकर गृह मंत्री अमित शाह पंजाब में अभियान शुरू करने जा रहे हैं. सूत्रों की मानें तो अब हर महीने गृह मंत्री पंजाब का दौरा करेंगे और वहां पार्टी की चुनावी रणनीति को धार देंगे. गृह मंत्री शाह का फोकस नशा मुक्त पंजाब अभियान के जरिए युवाओं पर फोकस करना है. ये कहीं न कहीं भावनात्मक मुद्दा भी है क्योंकि नशे से सिर्फ एक युवा बर्बाद नहीं होता बल्कि पूरे परिवार पर उसका असर पड़ता है. खासकर महिलाओं को बहुत समस्याओं का सामना करना पड़ता है.
महिलाओं को लेकर भी बीजेपी अन्य राज्यों की तरह ही कुछ कैश देने की घोषणा पर विचार कर रही है. भगवंत मान सरकार ने भी महिलाओं को लेकर कई घोषणाएं की लेकिन बीजेपी उनको पूरा न करने पर राज्य सरकार पर लगातार हमलावर है. इसके अलावा बीजेपी धर्मांतरण को भी पंजाब में बड़ा मुद्दा बनाएगी.
सिख-हिंदू वोटर्स को कैसे साधेगी
गृह मंत्री अमित शाह ने मोगा रैली में कहा था कि पंजाब में बीजेपी की सरकार बनते ही पहली कैबिनेट बैठक में धर्मांतरण के खिलाफ कानून आएगा. इससे बीजेपी सिख-हिंदू वोटर्स का अपने साथ लाने की कोशिश करेगी. इस पूरे मामले को लेकर आरएसएस भी पंजाब में लगातार अभियान चला रहा है. धर्म जागरण मंच धर्मांतरण के खिलाफ जमीनी स्तर पर काम करके माहौल तैयार कर रहा है. बॉर्डर से लगने वाले जिलों में तेजी से धर्मांतरण हुआ है. पंजाब में दलित और ओबीसी वर्ग से लोग तेजी से ईसाई बन रहे हैं.
इसके साथ साथ पंजाब में दलित और ओबीसी वर्ग को साधने के लिए बीजेपी डेरों को साधने की रणनीति तैयार कर रही है. पंजाब में तकरीबन 38 प्रतिशत दलित आबादी है. प्रधानमंत्री हाल ही में रविदास जयंती के दिन डेरा सचखंड बल्लां गए थे और वहां डेरा प्रमुख निरंजन दास महाराज के साथ मुलाकात की थी.
डेरों को साधने की रणनीति तैयार
निरंजन दास महाराज को सरकार ने पद्म श्री भी इसी साल दिया है. इनका संबंध वाराणसी के सीर गोवर्धन मठ से भी है. इसके अलावा डेरा राधास्वामी का भी पंजाब और हिमाचल में अच्छा खासा प्रभाव है. साल 2022 में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री दोनों ही डेरा प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्लो से मुलाकात कर चुके हैं. अन्य डेरों पर भी बीजेपी की नजर है. डेरों के जरिए बीजेपी पंजाब के 38% दलित और OBC वोटर्स को भी साधने में जुटी है.
बीजेपी के सामने एक बड़ी चुनौती पंजाब में जनाधार वाले नेता की कमी है. इसको लेकर भी पार्टी लगातार काम कर रही है. हाल ही में आम आदमी पार्टी से 7 सांसद पार्टी में शामिल कराए गए. उससे पहले रवनीत बिट्टू को कांग्रेस से बीजेपी में लाकर केंद्रीय मंत्री बनाया गया है. सुनील जाखड़ को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है.
कांग्रेस के बड़े चेहरे और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को भी पिछले चुनाव में पार्टी में शामिल कराया गया था. इस बार भी पार्टी अन्य पार्टियों के बड़े नेताओं को बीजेपी में शामिल करने के प्लान पर काम कर रही है, जिससे उनके माध्यम से पंजाब में स्थानीय स्तर पर जनाधार तैयार किया जा सके.
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