West Bengal Election 2026: ममता बनर्जी को क्यों नहीं मिला बंगाल की जनता का साथ, कैसे अपना गढ़ तक नहीं बचा पाई? ये है बड़ी वजह

West Bengal Election Results 2026: 4 मई को ममता बनर्जी के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा. यहां उन्हें भवानीपुर विधानसभा सीट से हार का सामना करना पड़ा है. उन्हें बीजेपी उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी ने हरा दिया है. 20 राउंड की गिनती के बाद नतीजे घोषित किए हैं. शुभेंदु अधिकारी ने 15 हजार के बड़े मार्जिन से बीजेपी को हराया है.  

बीजेपी उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे थे. उन्हें कुल 73,463 वोट मिले हैं. वहीं ममता बनर्जी को 58,350 वोट मिले हैं. शुभेंदु ने ममता को 15113 वोटों से हराया है. आखिर किन वजह से ममता बनर्जी ने यह चुनाव गंवा दिया है. आइए जानते हैं. इस सीट पर जब काउंटिंग शुरू हुई तो रुझानों में ही ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच कड़ा मुकाबला बना हुआ था.

क्या रहे ममता की हार के बड़े कारण?

ममता बनर्जी की हार के पीछे जो सबसे बड़ा कारण रहा है, उनका 15 साल का शासन. इसमें 15 साल बाद सत्ता विरोधी लहर ने ममता बनर्जी की छवि को काफी नुकसान पहुंचाया. इसके अलावा गैर बंगाली वोटर्स की नाराजगी भी इस सीट से उनकी हार का कारण बनी है. साथ ही सुभेंदु अधिकारी से उन्हें कड़ी टक्कर मिली है. पिछली बार भी नंदीग्राम सीट से शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें पटखनी दी थी. 

वोटर्स के बदलते मिजाज और दागदार होती ममता की छवि

इसके अलावा ममता सरकार के खिलाफ वोटर्स के बदलते मिजाज और भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण भी ममता बनर्जी की छवि दागदार हुई. इससे वोटर्स ने उनके खिलाफ जाने का फैसला किया. इस चुनाव में बड़ी संख्या में वोटर्स वोट डालने बाहर निकले. इसके अलावा 15 साल की सत्ता के दौरान पैदा हुई ऊब भी शामिल है. 

गैर बंगाली आबादी में बढ़ता असंतोष

भवानीपुर में गैर बंगाली आबादी काफी ज्यादा है. ऐसे में उनके भीतर पनपे असंतोष से ममता बनर्जी का पारंपरिक वोट बैंक खतरे में पड़ गया. उनकी पार्टी पर बढ़ते भ्रष्टाचार के आरोपों ने लोगों में उनके भरोसे को कम किया. उनकी स्थिति विधानसभा में काफी कमजोर साबित हुई. 

सुभेंदु अधिकारी ने जमीनी स्तर पर दी चुनौती

इस सीट पर बीजेपी ने जबरदस्त जमीनी स्तर पर कार्य किया. उन्हें सुभेंदु अधिकारी ने कड़ी चुनौती पेश की. स्थानीय वार्डों में टीएमसी विरोधी भावनाओं को एकजुट किया. महिला मतदाताओं में भी ममता के खिलाफ भारी गुस्सा देखने को मिला. यहां की महिलाओं में सुरक्षा और स्थानीय शासन को लेकर भी असंतोष चरम पर रहा. इसके अलावा स्थानीय चुनावों में भी टीएमसी कई वार्डों में पीछे नजर आई. 

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