- जसविंदर उर्फ जैज़ की संभावित रिहाई पर ड्रग्स के खिलाफ मुहिम पर सवाल।
- UAE से 2026 में गिरफ्तार जैज़ के कागजात जमा न होने पर रिहाई।
- जैज़ पर भारत में मैक्सिकन कार्टेल मॉडल लाने की कोशिश का आरोप।
- ड्रग्स तस्करी का पैसा देश विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल होने की आशंका।
भारत में ड्रग्स के खिलाफ चल रही सख्त मुहिम पर अब बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं, वजह है अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट से जुड़े कुख्यात आरोपी जसविंदर उर्फ जैज़ की संभावित रिहाई. बताया जा रहा है कि उसे UAE पुलिस ने 23 मार्च, 2026 को इंटरपोल अलर्ट के आधार पर गिरफ्तार किया था, लेकिन अब कुछ ही दिनों में उसके बाहर आने की संभावना जताई जा रही है.
सूत्रों के मुताबिक, अगर गिरफ्तारी के बाद तय समय सीमा के भीतर संबंधित देश की जांच एजेंसियां आरोपी के खिलाफ जरूरी दस्तावेज, केस रिकॉर्ड और सबूत पेश नहीं करती, तो स्थानीय अदालत राहत दे सकती है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इतने बड़े ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े आरोपी के मामले में भारतीय एजेंसियां धीमी क्यों पड़ गई?
उल्लेखनीय है कि जसविंदर उर्फ जैज़ भारतीय मूल का ब्रिटिश नागरिक है, जो लंबे समय से दुबई में रहकर ड्रग्स तस्करी के नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा था. उसका संबंध बिरमिंघम से बताया जाता है. जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड में उसका नाम कई बड़े मामलों में सामने आया है. बताया जाता है कि ग्रेटर नोएडा में पकड़ी गई ड्रग्स लैब और जालंधर में सिंथेटिक ड्रग्स यूनिट से भी उसका नाम जुड़ा था. उसकी जड़ें पंजाब से भी जुड़ी बताई जाती है.
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भारत में की थी विदेशी ड्रग्स नेटवर्क लाने की कोशिश
जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि जैज़ ने भारत में विदेशी ड्रग्स नेटवर्क, खासतौर पर मैक्सिकन कार्टेल मॉडल को लाने की कोशिश की थी. अगर ये दावा सही है, तो ये भारत की सुरक्षा के लिए बेहद गंभीर मामला माना जा रहा है, क्योंकि इससे देश में संगठित ड्रग्स कारोबार को नई ताकत मिल सकती थी.
सूत्रों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट के कुछ सदस्य अलग-अलग देशों की खुफिया एजेंसियों से भी संपर्क रखते हैं. हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जांच एजेंसियां ऐसे नेटवर्क को राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से देख रही हैं.
देश विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल होता है ड्रग्स तस्करी का पैसा
अधिकारियों का मानना है कि ड्रग्स तस्करी अब सिर्फ अपराध नहीं रही, बल्कि कई बार इसका पैसा देश विरोधी गतिविधियों, हवाला नेटवर्क और संगठित अपराध में भी इस्तेमाल होता है. भारत जैसी बड़ी आबादी वाले देश को ड्रग्स मार्केट बनाने की कोशिश लंबे समय से की जा रही है. यही वजह है कि एजेंसियां विदेशों में बैठे बड़े खिलाड़ियों की सूची तैयार कर उन्हें पकड़ने की कोशिश कर रही है. इस सूची में कई बड़े नाम शामिल बताए जाते हैं.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब जैज़ जैसा बड़ा आरोपी पकड़ लिया गया था, तो उसके खिलाफ जरूरी दस्तावेज समय पर क्यों नहीं भेजे गए. अगर वो तकनीकी कारणों से छूट जाता है, तो इसे जांच एजेंसियों की बड़ी चूक माना जा सकता है.
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